पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक आर्थिक एजेंडे से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ग्रीनलैंड को लेकर जारी रणनीतिक खींचतान के बीच ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले को यूरोप के खिलाफ एक सख्त आर्थिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ अटैक केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भूराजनीतिक दबाव और NATO की आंतरिक एकजुटता को परखने की रणनीति भी छिपी हो सकती है। ग्रीनलैंड, जो पहले से ही अमेरिका और यूरोप के बीच रणनीतिक महत्व का केंद्र बना हुआ है, अब इस टैरिफ फैसले के बाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
यूरोपीय देशों की ओर से इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। कई EU नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो जवाबी आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रंप का यह फैसला NATO में दरार पैदा करेगा, या फिर सहयोगी देश किसी समझौते पर पहुंचेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की यह नीति उनके “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे का हिस्सा है, जिसमें सहयोगियों पर भी दबाव बनाकर रणनीतिक फायदे हासिल करने की कोशिश की जाती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यूरोप इस टैरिफ युद्ध का किस तरह जवाब देता है और इसका असर वैश्विक व्यापार व सुरक्षा गठबंधनों पर कितना पड़ता है।


